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Uttarakhand: लगातार कम हो रहा है मतदान, खामोश रहकर क्या कहना चाहते हैं वोटर, 2019 के मुकाबले वोट प्रतिशत कम

By Alka Tiwari

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Uttarakhand: बीते लोकसभा चुनाव-2019 के मुकाबले इस बार मतदाताओं में मतदान को लेकर ज्यादा जोश नहीं दिखा। जिस तरह निर्वाचन विभाग ने मतदाता जागरुकता अभियान चलाया। इसके बावजूद इस बार कम मतदान हुआ है। सवाल यही उठ रहे हैं कि वोटर खामोशी से क्या सियासी संदेश दे गया है, आखिर ...

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Uttarakhand: बीते लोकसभा चुनाव-2019 के मुकाबले इस बार मतदाताओं में मतदान को लेकर ज्यादा जोश नहीं दिखा। जिस तरह निर्वाचन विभाग ने मतदाता जागरुकता अभियान चलाया। इसके बावजूद इस बार कम मतदान हुआ है।

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सवाल यही उठ रहे हैं कि वोटर खामोशी से क्या सियासी संदेश दे गया है, आखिर मतदान के प्रति वोटर में इतनी उदासीनता क्यों आई इस पर मंथन करने की बात है। 

Uttarakhand कम मतदान पर मंथन जरूरी

2014 हो या 2019 या फिर 2024, हर लोकसभा चुनाव में अल्मोड़ा संसदीय सीट पर सबसे अधिक 55.10 फीसदी मतदान चंपावत विधानसभा क्षेत्र में हुआ। यह बात अलग है कि पिछले दोनों लोकसभा चुनावों से इस बार के चुनाव में यहां कम मतदान हुआ।

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यहां 2014 के मुकाबले  4.81 फीसदी कम तो 2019 के मुकाबले 5.98 प्रतिशत वोटिंग कम हुई। इस संसदीय सीट पर सबसे कम 31.10 फीसदी मतदान सल्ट विस क्षेत्र में हुआ।

Uttarakhand पिछले दो चुनावों के मुकाबले मतदान प्रतिशत  गिरा

यही स्थिति नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट पर रही। यहा भी पिछले दो चुनावों के मुकाबले मतदान प्रतिशत  गिरा है। 2014 के मुकाबले यहां मतदान प्रतिशत में 2.96 फीसदी गिरावट आई है, जबकि 2019 के मुकाबले 8.43 फीसदी मतदान प्रतिशत घटा है। इस लोकसभा सीट पर सबसे कम 50.24 फीसदी   मतदान नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में पड़े।

Uttarakhand तमाम कोशिशों के बावजूद मतदाता रहे घरों में

Uttarakhand की पांचों लोकसभा सीटों पर मतदान प्रतिशत के जो रुझान आए हैं, उसने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। प्रचार और जागरूकता की तमाम कोशिशों के बावजूद उत्तराखंड का मतदाता बड़ी संख्या में अपने घरों से बाहर नहीं निकला।

Alka Tiwari

अलका तिवारी, उत्तराखंड की वरिष्ठ महिला पत्रकार हैं। पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। प्रिंट मीडिया के विभिन्न संस्थानों के साथ ही अलका तिवारी इलेक्ट्रानिक मीडिया, दूरदर्शन व रेडियो में भी सक्रिय रहीं हैं। मौजूदा वक्त में डिजिटल मीडिया में सक्रियता है।