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हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, कोर्ट ने वाटरसेस अधिनियम को किया ख़ारिज 

By Sandhya Kashyap

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Summary

हिमाचल सरकार के फैसले का पंजाब और हरियाणा ने भी जताया था विरोध हिमाचल सरकार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पावर प्रोजेक्टों पर वाटरसेस लगाने की दिशा में बढ़ रही सुक्खू सरकार के हिमाचल प्रदेश वाटर सेस अधिनियम को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है और इसे ...

विस्तार से पढ़ें:

हिमाचल सरकार के फैसले का पंजाब और हरियाणा ने भी जताया था विरोध

हिमाचल सरकार को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पावर प्रोजेक्टों पर वाटरसेस लगाने की दिशा में बढ़ रही सुक्खू सरकार के हिमाचल प्रदेश वाटर सेस अधिनियम को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है और इसे असंवैधानिक करार दिया है। इससे जुड़ी अधिसूचना को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने वाटर सेस आयोग का गठन राज्य विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है।

हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, कोर्ट ने वाटरसेस अधिनियम को किया ख़ारिज 

जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार ने बिजली परियोजनाओं पर वॉटर सेस लगाने की अधिसूचना जारी की थी। इसके खिलाफ, कुछ कंपनियों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली थी और इस फैसले का विरोध जताया था। तब से यह मामला कोर्ट में चल रहा था। अब इस मामले में हिमाचल सरकार को झटका लगा है और हाईकोर्ट में सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया है। 

वरिष्ठ वकील रजनीश मनिकटाला ने बताया कि आज हाईकोर्ट ने फैसला दिया है। उसके हिसाब से वाटर सेस जुड़ा कानून को असवैंधानिक करार दिया गया है। आर्टिकल 246 के तहत प्रदेश सरकार कानून बनाने का अधिकार नहीं है। ऐसे में अब सरकार बिजली कंपनियों से कोई सेस नहीं ले पाएगी। 

हिमाचल सरकार के फैसले का पंजाब और हरियाणा ने भी जताया था विरोध

अहम बात है कि हिमाचल सरकार के फैसले का पंजाब और हरियाणा ने भी विरोध जताया था। सुक्खू सरकार ने प्रदेश की आर्थिकी को पटरी पर लाने के लिए वॉटर सेस लगाने का फैसला किया था।  वॉटर सेस की दर 0.06 से लेकर 0.30 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई थी। इस फैसले के खिलाफ बीबीएमबी,एनटीपीसी,एनएचपीसी समेत कई अन्य कंपनियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। 

क्या है पूरा मामला

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हिमाचल सरकार ने हिमाचल प्रदेश में 173 बिजली परियोजना पर वाटर सेस लगाया था। प्रदेश के 173 प्रोजेक्टों से सालाना करीब 2000 करोड़ रुपये का आय का अनुमान लगाया गया था। बीते साल 25 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी सभी राज्यों को पत्र लिखकर वॉटर सेस को अवैध और असंवैधानिक बताया था। कहा गया था कि बिजली उत्पादन पर वॉटर सेस और अन्य शुल्क लगाने के लिए राज्य सरकारों के पास अधिकार नहीं है। 

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Courtsey : Bharat News